काठमांडू। सीपीएन-यूएमएल नेता प्रदीप ग्यावली ने विश्वविद्यालयों से छात्र संघों को बर्खास्त करने के फैसले को बेहद अलोकतांत्रिक बताया है। सरकार द्वारा विश्वविद्यालय से छात्र संघ को भंग करने की तैयारी के बाद ग्यावली ने यह टिप्पणी सोशल मीडिया के माध्यम से की।
ग्यावली ने कहा कि छात्र संघों को भंग करने के उद्देश्य से विश्वविद्यालयों में सुरक्षा इकाइयों की स्थापना शैक्षणिक स्वायत्तता में हस्तक्षेप है।
ग्यावली के मुताबिक छात्र संघ भंग करने के फैसले से विश्वविद्यालय की स्वायत्तता में हस्तक्षेप हुआ है।
ग्यावली ने सवाल किया है कि वर्तमान सरकार के इस दुस्साहस पर कुलपति कैसे हस्ताक्षर कर सकते थे जब सरकार ने पंचायत काल में भी छात्र संघ को भंग करने की हिम्मत नहीं की थी। विश्वविद्यालय के कुलपति ऐसे विषय पर
कैसे हस्ताक्षर कर सकते थे जो सरकार पंचायत निरंकुशता के सामने भी करने की हिम्मत नहीं कर सकती थी।
उनके मुताबिक छात्र आंदोलन में कुछ समस्याएं हैं, मुख्य मुद्दे में कुछ समस्या है, लेकिन संगठन पर प्रतिबंध इसका समाधान नहीं है, भले ही इसे शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए उत्प्रेरक बनना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि छात्र संघों पर प्रतिबंध लगाना समस्या का समाधान नहीं है। इसका समाधान उनके साथ संवाद, रचनात्मक सहयोग और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए छात्र आंदोलन का परिवर्तन है।
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