काठमांडू। सहकारी समितियों में अनियमितताओं की जांच के लिए गठित आयोग ने अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी है।
भूमि प्रबंधन, सहकारिता, संघीय मामलों और सामान्य प्रशासन मंत्रालय ने निष्कर्ष निकाला है कि कमजोर विनियमन, राजनीतिक हस्तक्षेप और गैर-पारदर्शी संचालन सहकारी क्षेत्र में संकट के मुख्य कारण हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सहकारी समितियों को पर्याप्त अध्ययन और मानदंडों के बिना सेवा केंद्रों और शाखाओं के पंजीकरण, दायरे के विस्तार और विस्तार की अनुमति दी गई थी। रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया कि कुछ निदेशकों ने सहकारी के मुख्य उद्देश्य से भटक गए, बचतकर्ताओं के पैसे का दुरुपयोग किया और गैर-पारदर्शी लेनदेन किए।
रिपोर्ट में सहकारी क्षेत्र में समस्याओं के मुख्य कारणों के रूप में कई नियामक निकायों के बीच समन्वय की कमी, प्रभावी सूचना प्रणाली की कमी, वित्तीय अनुशासनहीनता, खराब शासन और कुशल जनशक्ति की कमी की पहचान की गई है। आयोग ने निष्कर्ष निकाला है कि सहकारी समितियों और प्रबंधकों की राजनीतिक संबद्धता और प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष राजनीतिक हस्तक्षेप ने भी वर्तमान संकट में योगदान दिया है।
भूमि प्रबंधन, सहकारिता और गरीबी उपशमन मंत्रालय ने सहकारी क्षेत्र में सुधार के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की है। मंत्रालय ने कहा है कि सहकारी निगरानी और विनियमन को प्रभावी बनाने, अधिनियमों और नियमों में संशोधन करने और बचत और ऋण वसूली की वापसी को प्राथमिकता देकर सुधार किए गए हैं।
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