काठमांडू। नेपाल राष्ट्र बैंक (एनआरबी) ने बैंकिंग प्रणाली में देखी गई अतिरिक्त नकदी का प्रबंधन करने के लिए जमा संग्रह साधन से 60 अरब रुपये की निकासी करने का फैसला किया है। केंद्रीय बैंक पिछले कुछ हफ्तों में बाजार में जमा हुई अतिरिक्त तरलता को नियंत्रित करने के लिए ऐसे उपकरणों का उपयोग कर रहा है।
नेपाल राष्ट्र बैंक के अनुसार, बोली प्रक्रिया आज दोपहर 3:00 बजे शुरू होगी। बैंकों और वित्तीय संस्थानों को इस प्रक्रिया में भाग लेने और केंद्रीय बैंक में अपनी जमा राशि जमा करने का अवसर मिलेगा।
केंद्रीय बैंक की ओर से जारी नोटिस के मुताबिक, जमा देने के इच्छुक बैंक और वित्तीय संस्थान शेष हिस्से को विभाजित करते हुए न्यूनतम 10 करोड़ रुपये और अधिकतम 5 करोड़ रुपये तक की बोली लगा सकते हैं। नेपाल राष्ट्र बैंक (एनआरबी) ने साफ कर दिया है कि ब्याज दर के आधार पर बोली लगाई जा सकती है और कई ब्याज दरों पर कई बोली भी लगाई जा सकती है।
जमा संग्रह साधन 23 दिनों के लिए वैध होगा। एनआरबी के मुताबिक, एकत्रित राशि का मूलधन और ब्याज का भुगतान 2 जुलाई को किया जाएगा।
बैंकिंग प्रणाली में हाल के दिनों में ऋण की तुलनात्मक रूप से कमजोर मांग के कारण तरलता में काफी वृद्धि हुई है। इससे इंटरबैंक ब्याज दरों पर दबाव कम हुआ है और तरलता प्रबंधन चुनौतीपूर्ण हो गया है। ऐसे में केंद्रीय बैंक खुले बाजार के परिचालन के तहत जमा संग्रह उपकरणों का इस्तेमाल कर बाजार से अतिरिक्त धन निकालने की नीति अपना रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बैंकिंग प्रणाली में असंतुलन, ब्याज दरों को अस्थिर करने और मौद्रिक नीति की प्रभावशीलता को प्रभावित करने का खतरा है। इसलिए, राष्ट्र बैंक समय-समय पर ऐसे उपकरणों का उपयोग करके बाजार संतुलन बनाए रखने की कोशिश करता रहा है।
यह कहा गया है कि एनआरबी का उद्देश्य वर्तमान मौद्रिक प्रबंधन रणनीति के तहत बैंकों और वित्तीय संस्थानों में अधिशेष नकदी को उत्पादक क्षेत्रों में लगाना है। हालांकि लोन की मांग न होने की वजह से बैंकों में पैसों की स्थिति बन गई है।
इस लिहाज से केंद्रीय बैंक लगातार जमा संग्रह उपकरणों के जरिए बाजार से अरबों रुपये निकाल रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि हालांकि यह अल्पावधि में तरलता का प्रबंधन करेगा, लेकिन लंबी अवधि में, मुख्य चुनौती ऋण प्रवाह का विस्तार करना और आर्थिक गतिविधि को बढ़ाना है।
बैंकिंग क्षेत्र के अधिकारियों के अनुसार, एनआरबी के इस तरह के कदम से अंतरबैंक बाजार को स्थिर करने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही यह ब्याज दरों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने में भी भूमिका निभाएगा।
केंद्रीय बैंक ने संकेत दिया है कि वह बाजार की स्थिति के आधार पर आने वाले दिनों में अधिक तरलता प्रबंधन उपकरणों का उपयोग कर सकता है। इस प्रकार, एनआरबी द्वारा अपनाई गई तरलता प्रबंधन नीति बैंकिंग प्रणाली संतुलन और मौद्रिक स्थिरता को बनाए रखने पर केंद्रित प्रतीत होती है।
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