काठमांडू। सस्ते चीनी उत्पादों से कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण घरेलू ट्रांसफार्मर विनिर्माण उद्योग दबाव में हैं। इस दबाव का सीधा असर निक ब्रांड बनाने वाली कंपनी के कारोबार पर पड़ा है, जो नेपाल के सबसे पुराने ट्रांसफार्मर निर्माताओं में से एक है।
इन्फोमेरिक्स क्रेडिट रेटिंग्स नेपाल की हालिया मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी वित्त वर्ष 2081/82 में अपनी उत्पादन क्षमता का केवल 7 प्रतिशत ही उपयोग कर पाई है।
इससे पिछले वित्त वर्ष में क्षमता उपयोग 17 प्रतिशत था। रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग का एक बड़ा हिस्सा, जो सालाना 18,000 यूनिट ट्रांसफार्मर का उत्पादन कर सकता है, बेकार पड़ा है, जिससे निश्चित लागत बढ़ गई है और इससे कारोबार के रिटर्न पर असर पड़ा है।
उद्योग की परिचालन आय में भी काफी कमी आई है। वित्तीय वर्ष 2080/81 में, परिचालन आय 1.83 बिलियन रुपये से घटकर 2081/82 में लगभग 935 मिलियन रुपये हो गई है। इसका मुख्य कारण यह है कि नेपाल विद्युत प्राधिकरण (एनईए) की बड़ी परियोजनाओं की संख्या बहुत कम है और व्यवसाय मुख्य रूप से निजी क्षेत्र की छोटी परियोजनाओं तक ही सीमित है।
हालांकि कंपनी पिछले एक साल से भूटान को ट्रांसफार्मर भेज रही है, लेकिन पिछले वित्त वर्ष में निर्यात अपेक्षाकृत कम था। कंपनी ने कहा कि वह इस साल फिर से निर्यात बढ़ाने की तैयारी कर रही है। हालांकि व्यापार में कुछ सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने मई 2026 तक लगभग 957 मिलियन रुपये के खरीद ऑर्डर हासिल किए हैं, जिससे आने वाले समय में राजस्व में सुधार होने की उम्मीद है। हालांकि, रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि घरेलू ट्रांसफार्मर उद्योग की लाभप्रदता आसान नहीं होगी क्योंकि कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव होता है, अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर में बदलाव और विदेशी निर्माताओं के साथ मूल्य प्रतिस्पर्धा बनी रहती है।
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