काठमांडू। सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (नेकपा) के संयोजक पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ ने ३१ जनवरी को शहीद दिवस के अवसर पर राष्ट्र, राष्ट्रीयता, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और अधिकारों के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले सभी ज्ञात-अज्ञात शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की है।
नेपाल के परिवर्तन का इतिहास शहीदों के खून से लिखा गया बताते हुए दहल ने सामंती राणा शासन के खिलाफ लखन थापा, शुक्रराज शास्त्री को बंकाबीर, धर्म भक्त माथेमा, दशरथ चंद और गंगालाल श्रेष्ठ के बलिदान, किसानों के पक्ष में भीमदत्त पंत के संघर्ष, जन युद्ध, पंचायत काल से जन आंदोलन, मधेस, थारू और अन्य समुदायों के बलिदानों को याद किया।
उन्होंने कहा कि शहीदों का साझा उद्देश्य सामंतवाद, उत्पीड़न और भेदभाव को समाप्त करके लोकतंत्र, समानता, न्याय और लोगों के सुशासन की स्थापना करना है।
प्रचंड के अनुसार, आज नेपाल गणतंत्र, संघवाद, समावेशन और धर्मनिरपेक्षता तक पहुंच गया है और यह सभी शहीदों के अमूल्य बलिदान का परिणाम है।
शहीदों के सपनों को अभी तक पूरा नहीं होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय, आर्थिक समानता, भ्रष्टाचार को खत्म करने, सुशासन और राष्ट्रीय स्वतंत्रता के लिए संघर्ष अभी भी जारी है।
प्रचंड ने कहा कि शहीदों के अधूरे सपनों को पूरा किया जा सके, तभी शहीद दिवस सार्थक होगा।
उन्होंने सभी से आत्मनिरीक्षण करने, विचलित न होने और शहीद दिवस को लोगों के पक्ष में मजबूती से खड़े होकर संघर्ष के पथ पर आगे बढ़ने के दिन के रूप में लेने का आग्रह किया। उन्होंने सभी से उपलब्धियों के आधार पर एक समृद्ध समाजवादी नेपाल के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध होने का भी आग्रह किया।
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