काठमांडू। भक्तपुर में शुक्रवार से बिस्का जात्रा शुरू हो गया है। आठ दिन और नौ रातों तक मनाया जाने वाला यह ऐतिहासिक जात्रा धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
उत्सव के पहले दिन भद्रकाली के रथ को आज शाम पांच मंजिला मंदिर के सामने तौमडी क्षेत्र से घाटखा टोल ले जाया जाएगा। साथ ही भैरहनाथ ‘भैरख’ का रथ खींचकर बारात की औपचारिक शुरुआत की जाएगी।
अब अगले नौ दिनों तक भक्तपुर शहर जात्रा में रहेगा। परंपरा के अनुसार, भैरवनाथ और बेताल देवताओं को लकड़ी से बने पगोडा शैली में निर्मित तीन मंजिला भाईलख में बैठाया जाता है और ठाणे (ऊपरी) और क्वाने (निचला) टोल की ओर खींचा जाता है।
भाईलख: रथ खींचने से पहले उस पर तलवारें, तलवारें और निशान लगाने की प्रथा है। त्योहार का मुख्य आकर्षण रथ खींचना है जहां दो इलाकों के लोग रथ को अपने-अपने क्षेत्रों में खींचने के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं।
पहले दिन पांच मंजिला मंदिर परिसर से सामने पांच रस्सियों और उसके पीछे चार रस्सियों से भाईलख को खींचने की परंपरा है।
जात्रा के पहले दिन ‘देव कोहन बिज्यगु’ मनाया जाता है, जिसमें भैरव और भद्रकाली को रथ पर बैठाकर शहर के निचले हिस्से में घसीटा जाता है। इस प्रक्रिया में ‘रस्साकशी’ जैसा प्रतिस्पर्धी माहौल बनता है।
तौमादी चौराहे से शुरू होने वाली रथ यात्रा (पांच मंजिला मंदिर के सामने) को भक्तपुर की सांस्कृतिक पहचान का मुख्य आकर्षण माना जाता है।
बिस्का जात्रा नए साल के आगमन से जुड़ा एक पारंपरिक त्योहार है, जो भक्तपुर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाता है।
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