काठमांडू। काठमांडू जिला अदालत ने चिकित्सा उद्यमी दुर्गा प्रसाद प्रसाई के खिलाफ इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन एक्ट के आरोप में आरोपपत्र दायर किया है।
जिला सरकारी अटॉर्नी कार्यालय, काठमांडू ने इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजेक्शन एक्ट, 2063 की धारा 47 (1) (1) के तहत प्रसाई के खिलाफ सजा की मांग की है। प्रावधान के अनुसार, अपराधी को 100,000 रुपये तक का जुर्माना या पांच साल तक की जेल या दोनों हो सकते हैं।
इसी तरह कोर्ट ने इसी एक्ट की धारा 47 (20) के तहत और सजा और क्राइम विक्टिम्स प्रोटेक्शन एक्ट, 2075 के अनुसार पीड़ित राहत कोष को मुआवजा शुल्क देने की भी मांग की है।
चार्जशीट के अनुसार, प्रसाईं ने सोशल मीडिया (फेसबुक) के माध्यम से आगामी चुनावों के संबंध में भ्रामक और भड़काऊ बयान दिए थे। पुलिस जांच में पता चला है कि उसने 4 मार्च, 2002 को होने वाले चुनाव के खिलाफ बोलने की कोशिश की थी, यह कहते हुए दुश्मनी फैलाने की कोशिश की थी कि अगर चुनाव हुआ तो देश विभाजित हो जाएगा और चुनाव आचार संहिता, 2082 का उल्लंघन होगा।
प्रसाईं ने फेसबुक पर वीडियो पोस्ट करते हुए कहा था कि वह राजशाही और हिंदू राज्य की स्थापना होने तक चुनाव नहीं होने देंगे और अगर चुनाव होते हैं तो देश में अशांति पैदा हो जाएगी। वीडियो में इस बात के सबूत मिले हैं कि उसने हिंसक और भड़काऊ शब्दों का इस्तेमाल किया जैसे “मरो और मारने के लिए तैयार हो जाओ”।
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