काठमांडू। सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की गई है जिसमें देश भर में भूमिहीन सुकुमियों के न्याय और आवास का अधिकार सुनिश्चित करने की मांग की गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश त्रिपाठी ने शीर्ष अदालत में एक रिट याचिका दायर कर उचित वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना भूमिहीनों और भूमिहीन सुकुमियों को जबरन बेदखल करने के सरकार के कदम को चुनौती दी है।
रिट याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई 29 अप्रैल के लिए निर्धारित की गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिपाठी ने प्रधानमंत्री के हालिया निर्देश या किसी भी फैसले के आधार पर भूमिहीन अवैध कब्जाधारियों को उनकी बस्ती से बाहर नहीं निकालने और उन्हें बेदखल करने से पहले वैकल्पिक निपटान की व्यवस्था करने के लिए ‘परमादेश’ आदेश देने की मांग की है। याचिका में राज्य से भूमिहीन नागरिकों के अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए एक ठोस और राष्ट्रव्यापी मास्टर प्लान तैयार करने की भी मांग की गई है।
उन्होंने मांग की है कि उचित विकल्प और कानून की उचित प्रक्रिया के बिना किसी भी नागरिक को जबरन उनके निवास से बेदखल नहीं किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता ने सरकार से उच्चतम न्यायालय विनियम-2074 के नियम 49 के अनुसार अंतरिम आदेश जारी करने की मांग की है कि काठमांडू सहित देश की किसी भी बस्ती में अवैध कब्जा करने वालों को नहीं हटाया जाए और मामले का अंतिम निपटारा होने तक इससे संबंधित किसी भी नोटिस या परिपत्र को लागू नहीं किया जाए।
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