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सुप्रीम कोर्ट ने 11 शिक्षाविदों को आजीवन भत्ता देने से किया इनकार

कालोपाटी

३४ मिनेट अगाडि

काठमांडू। काठमांडू: सुप्रीम कोर्ट ने आजीवन भत्ता प्राप्त करने वाले 11 आजीवन शिक्षाविदों को भत्ते नहीं देने का फैसला किया है।

अकादमी की अकादमिक परिषद के कुलाधिपति भूपाल राय की अध्यक्षता में 24 फरवरी, 2022 को हुई अकादमी की बैठक में आजीवन सदस्यों के दोहरे भत्ते को रोकने का निर्णय लिया गया था।

अकादमी के सदस्य-सचिव डॉ. गिरिराज सिंह ने कहा कि 1 मार्च को सुप्रीम कोर्ट द्वारा रिट याचिका खारिज किए जाने के बाद कोर्ट के आदेश और अकादमी के फैसले को लागू किया जाएगा। धन प्रसाद सुबेदी ने जानकारी दी। उनके मुताबिक कोर्ट ने आजीवन सदस्यों की दोहरी सुविधा पर रोक लगाने के अकादमी के फैसले को मंजूरी दे दी है।

पूर्व कुलपति प्रो. डॉक्‍टर। यह रिट याचिका बासुदेव त्रिपाठी सहित 11 आजीवन शैक्षणिक सदस्यों ने दायर की थी। न्यायमूर्ति मनोज कुमार शर्मा और न्यायमूर्ति नृप ध्वज निरौला की खंडपीठ ने 1 मार्च को रिट याचिका खारिज कर दी थी।

अब से जिन लोगों को दोहरा लाभ नहीं मिलेगा, डॉ. त्रिपाठी, प्रा. डॉक्‍टर। चूड़ामणि बंधु रेग्मी, गंगा प्रसाद उप्रेती, प्रा. डॉक्‍टर। योगेंद्र प्रसाद यादव, तीर्थ बहादुर श्रेष्ठ, आरडी प्रभास (राजेश्वरी दत्त चटौत), अशेष कुमार मल्ल, डॉ. ध्रुव चंद्र गौतम, टोया गुरुंग, तुलसी प्रसाद जोशी (तुलसी दिवस) और शशि बिक्रम शाह।

अकादमी ने सरकारी सेवा या निकायों के वेतन और पेंशन प्राप्त करने वाले आजीवन सदस्यों के भत्ते रोकने का फैसला किया था, लेकिन ऐसे आजीवन शैक्षणिक सदस्य तर्क दे रहे थे कि उनके शैक्षणिक योगदान के आधार पर दी जाने वाली मानद छात्रवृत्ति को दोहरी सुविधा या पारिश्रमिक नहीं कहा जा सकता है। घनेंद्र ओझा ने अकादमी में रिट याचिका भी दायर कर मांग की थी कि आजीवन सदस्यों को दोहरी सुविधाएं नहीं दी जानी चाहिए।

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