काठमांडू। हाल के वर्षों में खाद्य आयात पर नेपाल की निर्भरता बढ़ी है। चालू वित्त वर्ष 2082/83 के पहले आठ महीनों के आंकड़ों के अनुसार, चावल, मक्का, सेब और सब्जियों जैसी दैनिक आवश्यक वस्तुओं के आयात में पिछले वर्ष की तुलना में काफी वृद्धि हुई है।
सीमा शुल्क विभाग के तुलनात्मक आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि के दौरान चावल (चावल, चावल और बासमती सहित) खाद्य पदार्थों का सबसे अधिक आयात रहा है। चालू वित्त वर्ष में चावल का आयात 14.6 प्रतिशत बढ़कर 27÷.91 अरब रुपये हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों में 24.36 अरब रुपये था। यह पिछले साल की तुलना में 3.55 अरब रुपये की बढ़ोतरी है।
इसी तरह समीक्षा अवधि में सेब के आयात में 15.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस साल 8.11 अरब रुपये मूल्य के सेब का आयात किया गया, जो पिछले साल 7.02 अरब रुपये था। अनाज फसलों के तहत मक्का का आयात भी 7.90 अरब रुपये पर पहुंच गया है, जो पिछले साल की तुलना में 1.02 अरब (14.8 प्रतिशत) अधिक है।
रसोई में रोजाना इस्तेमाल होने वाले आलू और प्याज के आयात के आंकड़े भी उतने ही चुनौतीपूर्ण हैं। चालू वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों में 6.79 अरब रुपये मूल्य के आलू का आयात किया गया, जो पिछले साल की तुलना में 14.3 प्रतिशत अधिक है। सबसे ज्यादा प्रतिशत की बढ़ोतरी प्याज में देखने को मिली है। प्याज का आयात 19.7 प्रतिशत बढ़कर 4.92 अरब रुपये हो गया।
ये आंकड़े इस तथ्य को और उजागर करते हैं कि यद्यपि नेपाल एक कृषि प्रधान देश है, लेकिन इसे बुनियादी खाद्यान्न के लिए विदेशी बाजारों पर निर्भर रहना पड़ता है। सरकार की नीतियों और उत्पादन बढ़ाने के दावों के बावजूद आयात के ग्राफ में आई तेजी ने देश के व्यापार घाटे को कम करने के लिए एक बड़ी चुनौती जोड़ दी है। चावल, मक्का और सब्जियों जैसी वस्तुओं में इस वृद्धि ने घरेलू उत्पादन और बाजार प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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