काठमांडू। अब से राष्ट्रीय पहचान पत्र बनवाने के लिए अलग से आवेदन पत्र भरने की जरूरत नहीं है। गृह मंत्रालय ने अलग-अलग फॉर्म भरने की आवश्यकता के बिना नागरिकता और राष्ट्रीय पहचान पत्र की डेटाबेस प्रणाली को विलय करने का निर्णय लिया है।
गृह मंत्री ओम प्रकाश अर्याल ने गुरुवार को जिला प्रशासन कार्यालय ललितपुर के निरीक्षण के दौरान इस बात की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय नागरिकता प्रबंधन सूचना प्रणाली और मंत्रालय द्वारा संचालित राष्ट्रीय पहचान प्रबंधन सूचना प्रणाली के बीच डेटा के आदान-प्रदान की व्यवस्था की गई है।
इस प्रणाली के बाद नागरिकता के समय भरे गए विवरण के आधार पर राष्ट्रीय पहचान पत्र बनाया जा सकता है। मंत्रालय का मानना है कि इस नई व्यवस्था से नागरिकों के फॉर्म भरने का खर्च और समय बचेगा। इससे पहले, आवेदन पत्र भरने और राष्ट्रीय पहचान पत्र के पंजीकरण के लिए बायोमेट्रिक विवरण प्रदान करने के लिए नामित इकाई में प्रवेश करना अनिवार्य था।
गृह मंत्रालय के मुताबिक, राष्ट्रीय पहचान पत्र प्रणाली को 12 अन्य सार्वजनिक सेवाओं से जोड़ने का काम अब तक पूरा हो चुका है। मंत्रालय के मुताबिक, डुप्लीकेशन को नियंत्रित किया गया है और सिस्टम को विभिन्न एजेंसियों से जोड़कर सरकारी खजाने को भी बचाया जा रहा है।
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