काठमांडू। नेपाल प्रेस यूनियन (एनपीयू) ने निजी मीडिया में सरकारी विज्ञापनों के प्रकाशन पर प्रतिबंध लगाने के सरकार के फैसले के खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी संवाद कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की है।
एनपीयू के महासचिव दिलीप पौडेल की ओर से जारी सर्कुलर में नेपाल प्रेस यूनियन (एनपीयू) ने नेपाल प्रेस यूनियन (एनपीयू) की सभी प्रांतों, जिला शाखाओं और शाखाओं को निजी मीडिया पर सरकारी विज्ञापन के प्रभाव पर 7 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद के कार्यालय द्वारा हाल ही में जारी निर्देश के अनुसार सार्वजनिक खरीद से संबंधित सभी प्रकार के सरकारी विज्ञापन, सूचना और सूचनाओं को सरकारी स्वामित्व वाले मीडिया के माध्यम से ही प्रकाशित और प्रसारित किया जाना चाहिए।
एनपीयू के महासचिव दिलीप पौडेल के अनुसार, इस फैसले से निजी और स्वतंत्र मीडिया में गंभीर आर्थिक संकट पैदा होगा, नौकरियां चली जाएंगी, मीडिया घराने बंद हो जाएंगे और सूचनाओं की बहुलता में कमी आएगी।
संघ ने देश भर की सभी जिला शाखाओं, अकादमी शाखाओं और प्रांतीय समितियों को संवाद कार्यक्रम आयोजित करने का निर्देश दिया है। कार्यक्रम में मीडिया मालिक, संपादक, पत्रकार, विज्ञापन एजेंसियां, कानूनी विशेषज्ञ और मीडिया विशेषज्ञ भाग लेंगे। इसमें सरकार से यह भी अनुरोध किया गया है कि चर्चा से प्राप्त निष्कर्षों, सुझावों और सिफारिशों के साथ रिपोर्ट 13 अप्रैल, 2082 तक केंद्रीय कार्यालय को भेजी जाए।
नेपाल प्रेस यूनियन के अध्यक्ष शिवा लम्साल ने कहा कि सरकार के इस फैसले का प्रेस की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा असर पड़ेगा।
यूनियन ने मांग की है कि सरकार विज्ञापन वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाए, मितव्ययिता बनाए रखे और निजी मीडिया को भी शामिल करने के लिए नीतिगत प्रावधान करे। यूनियन ने कहा है कि देश भर से ठोस सुझाव एकत्र किए जाएंगे और हितधारकों की भागीदारी से सरकार को प्रस्तुत किए जाएंगे।
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