काठमांडू। प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद के कार्यालय ने उन कर्मचारियों और अधिकारियों से वाहन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है जो पहुंच के आधार पर सरकारी वाहनों की सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं।
प्रधानमंत्री सचिवालय के अनुसार, अब तक विभिन्न मंत्रालयों, निकायों और संवैधानिक आयोगों से 622 सरकारी वाहन वापस लिए गए हैं।
प्रारंभिक जांच में पाया गया कि निचले स्तर के कर्मचारी और निचले स्तर के अधिकारी भी सरकारी वाहनों का उपयोग कर रहे थे, जबकि कानूनी प्रावधान है कि केवल प्रथम श्रेणी या उससे ऊपर के राजपत्रित अधिकारी ही सरकारी वाहनों की सुविधा के हकदार हैं।
सभी सरकारी निकायों के कर्मचारियों और अधिकारियों द्वारा उपयोग किए जा रहे वाहनों का विवरण मांगा गया है। 10 मई को एक सर्कुलर जारी किया गया था, जिसमें सरकार को निर्देश दिया गया था कि वह उन सभी वाहनों को तुरंत वापस करे, जिनका उपयोग कर्मचारियों और अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है, जिन्हें प्रचलित कानून के अनुसार वाहन उपलब्ध कराने की आवश्यकता नहीं है।
किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को कानून द्वारा निर्धारित के अलावा अकेले सरकारी वाहन का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, सभी स्तरों के कर्मचारियों और अधिकारियों को विशेष कार्य या असहज परिस्थितियों में सामूहिक रूप से सरकारी वाहनों का उपयोग करने की अनुमति होगी।
सचिवालय ने कहा है कि वह कानून के खिलाफ सरकारी वाहनों के इस्तेमाल के वित्तीय बोझ का अध्ययन कर रहा है।
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