काठमांडू। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने घोषणा की है कि सरकार स्कूलों और नौकरशाही को दलगत राजनीति से मुक्त करेगी। फेसबुक के माध्यम से अपने विचारों को सार्वजनिक करते हुए उन्होंने कहा कि वर्षों से जड़ें जमा चुके छात्रों और नौकरशाही के दलीकरण ने देश की व्यवस्था को नष्ट कर दिया है।
उन्होंने कहा, “सरकार ने कई पत्रकारों, नेताओं और आम जनता की शिकायतों को दूर करने के लिए एक अध्यादेश के माध्यम से इन विसंगतियों को दूर करने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री शाह के मुताबिक स्कूलों में पार्टी का झंडा और नौकरशाही में पार्टी बैग ले जाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
प्रधानमंत्री ने छात्र और कर्मचारी संघों पर संबंधित क्षेत्र के हितों से अधिक राजनीतिक दलों के ‘स्लीपर सेल’ बनने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि योग्यता के बजाय बैग और झंडों की कीमत बढ़ने से व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर हुआ है।
उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरजेपी) ने राजनीति को संस्था और नौकरशाही से इसलिए नहीं हटाया क्योंकि वह एक संगठन का निर्माण नहीं कर सकी, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करने और कर्मचारियों की गरिमा की रक्षा करने के लिए। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, “यदि आप चाहें, तो आप आज के दिन में एक बड़ा संगठन बना सकते हैं, लेकिन अतीत ने दिखाया है कि एक और पक्षपातपूर्ण संगठन को जोड़ने से सुधार नहीं होगा।
शाह ने कहा, “यह निर्णय किसी के अधिकारों को नहीं छीनेगा बल्कि पेशेवर स्वतंत्रता को और मजबूत करेगा। उन्होंने संकल्प लिया है कि आने वाले दिनों में नियुक्ति, स्थानांतरण और पदोन्नति का आधार केवल विधि, क्षमता और दक्षता होगी, न कि पक्षपातपूर्ण संबद्धता।
उन्होंने जोर देकर कहा कि छात्रों को नेताओं की भीड़ से नहीं, बल्कि अपने गुरुओं से राजनीति सीखनी चाहिए, जबकि कर्मचारियों को नेताओं की छाया से नहीं बल्कि पद्धति का रास्ता खोजना चाहिए। प्रधानमंत्री का तर्क है कि यह किसी पार्टी के खिलाफ लड़ाई नहीं है बल्कि पूरी व्यवस्था और भविष्य को बचाने की कोशिश है।
उन्होंने कहा कि देश को दलगत कब्जे से बाहर निकालकर संस्थागत रास्ते पर लाने के लिए स्कूलों और नौकरशाही को संक्रमण से मुक्त बनाना अनिवार्य है। यह दावा करते हुए कि बदलाव भाषण से नहीं बल्कि निर्णय से आएगा, प्रधानमंत्री शाह ने स्पष्ट किया कि लोगों की इच्छा के अनुसार अध्यादेश के माध्यम से सख्त कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा, ‘हम जो कुछ भी करेंगे, हम नेपाल के लोगों के कल्याण के लिए करेंगे, आप निश्चिंत हो सकते हैं.’ उन्होंने इस ऐतिहासिक बदलाव के लिए सभी आम जनता के समर्थन और विश्वास की उम्मीद की.
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