काठमांडू। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने अपने संघीय सांसदों को निर्देश दिया है कि वे परिवार के सदस्यों और करीबी रिश्तेदारों को निजी सचिव के रूप में नियुक्त न करें। पार्टी ने निजी सचिवों की नियुक्ति के लिए बुनियादी मानदंड जारी किए हैं और कहा है कि भाई-भतीजावाद और भाई-भतीजावाद पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
आरएसपी के महासचिव बिपिन कुमार आचार्य की ओर से जारी आंतरिक निर्देश में कहा गया है कि सांसदों को अपने निजी सचिवों की नियुक्ति करते समय पार्टी के विधान, सुशासन के सिद्धांतों और सार्वजनिक जवाबदेही को केंद्र में रखना चाहिए। निर्देश के अनुसार, एक ही परिवार के सदस्य या करीबी रिश्तेदार को निजी सचिव के रूप में नियुक्त नहीं किया जा सकता है।
पार्टी के क़ानून और सुशासन की मुख्य नीति के अनुसार, निजी सचिव की नियुक्ति करते समय एक ही परिवार के सदस्यों या करीबी रिश्तेदारों को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाता है। निर्देश में कहा गया है कि नियुक्तियां बाहरी परिवार और रिश्तेदारों से की जानी चाहिए। सरकार ने हाल ही में संघीय संसद के सदस्यों को निजी सचिवों की नियुक्ति करने की अनुमति देने का फैसला किया था।
मंत्रिपरिषद के निर्णय के बाद संघीय संसद के पदाधिकारियों और सदस्यों के पारिश्रमिक और सुविधाओं से संबंधित अधिनियम की अनुसूची 2 में संशोधन किया गया है। इस प्रावधान के अनुसार, प्रत्येक सांसद अब राजपत्रित तृतीय श्रेणी (जैसे अनुभाग अधिकारी) के निजी सचिव को नियुक्त कर सकता है।
हालांकि, आरएसपी ने राज्य के खजाने द्वारा प्रदान की जाने वाली सुविधाओं का उपयोग सुनिश्चित करने के लिए निजी सचिवों की नियुक्ति की प्रक्रिया को पारदर्शी, मितव्ययी और लोगों के प्रति जवाबदेह बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। पार्टी ने सांसदों से आग्रह किया है कि वे अपने निजी सचिवों का चयन योग्यता, क्षमता, दक्षता और व्यावसायिकता के आधार पर ही करें।
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