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पीएम ओली के शपथ लेने से इनकार के खिलाफ रिट याचिका दायर

कालोपाटी

३ दिन अगाडि

काठमांडू। सुप्रीम कोर्ट ने तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली द्वारा दायर एक रिट याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने पद और गोपनीयता की शपथ लेते समय ‘मैं वादा करता हूं’ वाक्यांश का उच्चारण करने से इनकार कर दिया था।

वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश त्रिपाठी, डॉ. न्यायमूर्ति विनोद शर्मा और न्यायमूर्ति सुनील कुमार पोखरेल की खंडपीठ ने न्यायमूर्ति चंद्रकांत ज्ञवाली और न्यायमूर्ति राजकुमार सुवाल, न्यायमूर्ति नवराज अधिकारी, न्यायमूर्ति संतोष भंडारी, लोकेंद्र बहादुर ओली और न्यायमूर्ति सीता श्रेष्ठ की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया।

तत्कालीन प्रधानमंत्री ओली ने जब तत्कालीन राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी से पद और गोपनीयता की शपथ ली थी, तो शपथ ग्रहण की भाषा में पद की शपथ की भाषा शामिल नहीं की गई थी। 14 मई, 2008 को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेते समय ओली ने कहा था कि ‘मैं वादा करता हूं’ वाक्यांश की जरूरत नहीं है, जिसके कारण सड़कों से लेकर संसद तक विरोध प्रदर्शन और आलोचना हुई।

सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की गई है जिसमें मांग की गई है कि ओली के पद और गोपनीयता की शपथ को रद्द किया जाए और कानूनी ढांचे के अनुसार शपथ ली जाए। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि नेपाल के संविधान का अनुच्छेद 80 शपथ ग्रहण प्रावधान का उल्लंघन करता है।

ओली ने ‘मैं शपथ लेने का वादा करता हूं’ पर विवाद के बाद पद की शपथ से संबंधित अध्यादेश लाकर ‘मैं वादा करता हूं’ शब्द को हटा दिया था। उस समय विवाद और आलोचना के बाद ओली के नेतृत्व वाली सरकार ने ‘2078 में शपथ लेने पर अध्यादेश’ जारी किया था।

अध्यादेश की धारा 3 (2) ने शपथ प्रारूप के प्रावधान में संशोधन करते हुए कहा था, “मैं….. मैं नेपाल के संविधान के प्रति पूरी निष्ठा के साथ भगवान, देश और लोगों के नाम पर शपथ लेता हूं, जहां नेपाल की संप्रभुता और संप्रभुता नेपाली लोगों में निहित है।

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