काठमांडू। रेखा यादव ने सरकार पर संवेदनशील मुद्दों पर जानकारी छिपाने और संसद के प्रति गैरजिम्मेदाराना व्यवहार करने का आरोप लगाया।
मंगलवार को प्रतिनिधि सभा की बैठक में बोलते हुए उन्होंने सरकार पर गृह मंत्री से जुड़ी रिपोर्ट को छिपाने का आरोप लगाया क्योंकि उसने मानवाधिकारों से जुड़ी रिपोर्ट को छिपाया था।
सांसद यादव ने वित्त मंत्री के हालिया बयान पर भी कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि मंत्री के लिए संसद के पटल से सांसदों को धमकी भरे तरीके से बोलना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा, “जिस तरह मानवाधिकार रिपोर्ट को छिपाया गया था, उसी तरह गृह मंत्री की रिपोर्ट को भी छिपाया गया है। इसी प्रकार, मैं वित्त मंत्री के वक्तव्य पर कड़ी आपत्ति व्यक्त करना चाहूंगा। मंत्री को रोस्ट्रम से सांसद को डराना नहीं चाहिए।
देश में नियम और कानून हैं, क्या आप फाइल खोलने की धमकी दे सकते हैं? नियमों और विनियमों के तहत फाइल दाखिल करना अपना बचाव करने के लिए खतरा नहीं है। ‘
सीमा विवाद का मुद्दा उठाते हुए यादव ने असंतोष जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने अभी तक स्पष्ट और ठोस जवाब नहीं दिया है। इससे पहले उन्होंने कहा था कि विदेश मंत्री ने जो जवाब दिया है, वह केवल लीपापोती है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री की टिप्पणी के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में दिखने वाली गतिविधियों की जिम्मेदारी कौन लेगा।
उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए सीमा विवाद का ठोस जवाब हमें कब मिलेगा? मैं सरकार से मांग करना चाहता हूं। विदेश मंत्री ने हमें जवाब दिया जैसे उन्होंने अतीत में बच्चों को लॉलीपॉप दिखाया हो। यह हर कोई जानता है। यह सिर्फ एक कवर-अप है।
उन्होंने भौतिक अवसंरचना और परिवहन मंत्री द्वारा दिए गए बयान पर भी आपत्ति जताई कि अगर ठेकेदार काम पूरा नहीं करते हैं तो उनके पैर टूट जाएंगे।
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