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नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी ने रुकुम (पूर्व) में 31 वां जन युद्ध दिवस मनाया

कालोपाटी

७ घण्टा अगाडि

काठमांडू। नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएन) आज रुकुम (पूर्व) में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करके 31वां जनयुद्ध दिवस मना रही है।

नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी (नेकपा) के संयोजक पुष्प कमल दहल ‘प्रचण्ड’ शहीद, बेपत्ता एवं घायल, विकलांग एवं स्थानीय लोगों के परिवार के साथ संयुक्त रूप से रुकुम (पूर्व) पहुंचे हैं।

14 फरवरी 2052 को तत्कालीन सीपीएन (माओवादी) द्वारा शुरू किया गया जनयुद्ध दस साल तक चला। यह पहली बार है जब नेता प्रचंड रुकुम (पूर्व) में जन युद्ध दिवस मना रहे हैं। रुकुम (पूर्व) संघवाद की स्थापना के बाद गठित सबसे युवा जिलों में से एक है। प्रचंड अपने नेतृत्व वाले जनयुद्ध के आधार क्षेत्र से समाजवादी क्रांति की शुरुआत करने के उद्देश्य से रुकुम (पूर्व) से प्रतिनिधि सभा के उम्मीदवार हैं।

यसैगरी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (नेकपा) का संयोजक पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचण्ड’ द्वारा आज भूमे गाउँपालिका–२ खबाङ बगरमा आयोजित कार्यक्रममा शहीद परिवारजनलाई सम्मान गर्ने कार्यक्रम रहेको छ । रुकुम (पूर्व) में 252 शहीद हुए हैं।

तत्कालीन सीपीएन (माओवादी) ने राजशाही को समाप्त करने और एक नई लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित करने के उद्देश्य से फाल्गुन 1, 1995 को जनयुद्ध शुरू किया था। माओवादियों ने रुकुम में आठबिसकोट पुलिस चौकी, रोल्पा में होलरी पुलिस चौकी, सिंधुली में सिंधुलीगढी पुलिस चौकी और गोरखा के च्यांगली में कृषि विकास बैंक पर हमला करके विद्रोह शुरू किया था।

माओवादियों ने जनयुद्ध को आगे बढ़ाने के लिए रुकुम (पूर्व), रुकुम (पश्चिम और पूर्व) और रोल्पा जिलों को अपना आधार क्षेत्र बनाया था।

9 मई, 1993 को ऊपरी सेरा के चेराबांग में माओवादियों द्वारा घात लगाकर किए गए हमले में एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई थी। माओवादियों ने 16 जनवरी, 1998 को क्यूबांग में घात लगाकर किए गए हमले के दौरान नेपाल में पहली बार तीन नॉट वाली तीन राइफलें जब्त की थीं।

19 सितंबर, 2056 को पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) थुले राय और अन्य सुरक्षाकर्मियों को महत में तैनात पुलिस पर हमला करने के बाद नियंत्रण में ले लिया गया। राय उन शीर्ष पुलिस अधिकारियों में से एक थे, जिन्हें जनयुद्ध के दौरान माओवादियों के नियंत्रण में लिया गया था। माओवादियों ने राय का अपने शीर्ष नेता देव गुरुंग से अदला-बदली की थी।

चैत्र 2057 में रुकुमकोट थाने पर हमला कर पूरी तरह से कब्जा कर लिया गया। इस हमले में 32 पुलिसकर्मियों और आठ हमलावरों सहित कुल 40 लोग मारे गए थे।

जनवरी 2061 में रुकुम के लाबांग में हुई सीपीएन (माओवादी सेंटर) की पोलित ब्यूरो की बैठक में डॉ. बाबूराम भट्टाराई को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। विसं २०६२ में रुकुम के चुनबांग में हुई तत्कालीन नेकपा माओवादी की केन्द्रीय समिति की बैठक में लोकतांत्रिक गणराज्य की राजनीतिक लाइन का समर्थन करते हुए शांतिपूर्ण राजनीतिक यात्रा की ओर बढ़ने का निर्णय लिया गया था।

चुनबांग बैठक के निर्णय को लागू करने के क्रम में सात राजनीतिक दलों के बीच 12 सूत्री सहमति बन गई थी। समझौते के अनुसार, जनयुद्ध और जन आंदोलन के तालमेल ने राजशाही को समाप्त कर दिया और सामाजिक न्याय के साथ-साथ गणतंत्र, संघवाद, धर्मनिरपेक्षता और आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली की स्थापना की।

आज जन युद्ध दिवस मनाने से पहले समन्वयक प्रचंड ने कहा कि छापामारों ने पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) थुले राय को नियंत्रण में ले लिया है। उनका लबांग गांव का दौरा करने का कार्यक्रम है, जहां बाबूराम भट्टाराई के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया है। वह इन गांवों में मतदाताओं से मिलेंगे जबकि प्रचंड का भी आज चुनबांग जाने का कार्यक्रम है।

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