काठमांडू। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) भोटेकोशी बाढ़ में लापता हुए लोगों को मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की तैयारी कर रहा है।
मंगलवार को सिंहदरबार में आयोजित भोटेकोशी और कालीगंडकी कॉरिडोर आपदाओं के अध्ययन और निगरानी पर संसदीय विशेष समिति की बैठक में एनआरए के कार्यकारी प्रमुख डॉ. धर्मराज उप्रेती ने बताया कि बाढ़ के संदर्भ में लापता लोगों को ‘मृत्यु’ या ‘मृत्यु’ मानने के लिए अधिनियम में संशोधन किया गया है।
उन्होंने कहा कि डीएनए टेस्ट के नतीजे पुलिस प्रयोगशाला में आने के बाद सत्यापन प्रक्रिया आसान हो जाएगी और वह भी अंतिम चरण में पहुंच जाएगा।
उन्होंने कहा कि राहत और बचाव के मामले में अभी भी काम चल रहा है और बाकी के काम को लेकर लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचा मंत्रालय पुनर्निर्माण के लिए ट्रांजिस्टल सेंटर बनाने और उन्हें जल्द से जल्द आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी ले रहा है।
उन्होंने बताया कि मनांग, मस्टैंग, म्याग्दी और पर्वत जिलों को पिछले मानसून में बाढ़ से हुए नुकसान और अन्य भौतिक बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान के लिए ‘संकटग्रस्त क्षेत्र’ घोषित कर काम शुरू कर दिया गया है।
अवसंरचना विकास मंत्रालय के सचिव पद्म कुमार मैनाली ने बताया कि ट्रांजिटिंग-सेंटर के उद्देश्य से भूमि प्रबंधन मंत्रालय के माध्यम से 300 स्थानों पर भूमि की पहचान की गई है।
उन्होंने कहा कि दशैं से पहले संक्रमणकालीन केंद्रों के रूप में 100 उच्च गुणवत्ता वाले टेंट स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि समन्वय अभी किया जाना बाकी है क्योंकि स्थानीय स्तर लाभार्थियों का चयन करेगा।
भोटेकोशी और कालीगण्डकी कॉरिडोर आपदा के अध्ययन और निगरानी के लिए संसदीय विशेष समिति के अध्यक्ष कृष्ण प्रसाद पौडेल ने कहा कि तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर रिपोर्ट तैयार करने के बाद रिपोर्ट नेशनल असेंबली को पेश की जाएगी।
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