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गन्ना काटने की जल्दबाजी में बड़ा किसान (सात तस्वीरें)

कालोपाटी

५ घण्टा अगाडि

काठमांडू। गन्ने का सीजन शुरू होने के साथ ही किसान गन्ने की कटाई के लिए उत्सुक हैं। गन्ने की कटाई और चीनी मिलों तक ले जाने के लिए किसान सुबह से शाम तक खेतों में व्यस्त रहते हैं। उनका कहना है कि गन्ने की खेती किसानों के दरवाजे पर ही रोजगार का साधन बन गई है और कई लोगों के जीवन स्तर में सुधार हुआ है।

किसान बारा की एकमात्र चीनी मिल रिलायंस शुगर मिल्स में गन्ना बेचने में व्यस्त हैं। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2082-83 के लिए गन्ने का न्यूनतम मूल्य 620 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है और किसानों को 70 रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी के साथ 690 रुपये मिलेंगे। हालांकि, किसानों ने शिकायत की है कि उत्पादन लागत में वृद्धि के कारण मूल्य अपर्याप्त है। किसानों के प्रतिनिधियों ने 750 रुपये प्रति क्विंटल की मांग की थी। हर साल की तरह इस बार भी किसान प्रतिनिधियों और चीनी मिलों के प्रतिनिधियों के बीच खींचतान देखने को मिल रही है।

गन्ने की खेती अभी भी बारा के किसानों के लिए मुख्य नकदी फसल है। किसानों को उम्मीद है कि गन्ने की खेती से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी अगर उन्हें उचित मूल्य और समय पर भुगतान मिलता है। नेपाल में, गन्ने की बुवाई का सबसे अच्छा समय फरवरी से अप्रैल तक और रोपण के लगभग 10 से 12 महीने बाद, यानी नवंबर से मार्च तक है। यही कारण है कि सर्दी शुरू होने के साथ ही गन्ने को काटकर चीनी मिलों तक भेजने का काम तेज हो जाता है।

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